Farrukhabad Cyber Crime News: फर्रुखाबाद में साइबर ठगी का एक और मामला सामने आया है, जहां एक महिला को फोन पर बातचीत में उलझाकर उसके बैंक खाते से कुल 1 लाख 38 हजार रुपये निकाल लिए गए। ठगी की रकम एक बार में नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन के माध्यम से खाते से ट्रांसफर की गई। घटना के बाद पीड़िता ने साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब ऑनलाइन बैंकिंग और UPI का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। डिजिटल भुगतान ने लोगों के लिए पैसे भेजना और प्राप्त करना आसान बनाया है, लेकिन इसी के साथ साइबर ठगी के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं। ऐसे मामलों में थोड़ी सी सावधानी लोगों को बड़ी आर्थिक परेशानी से बचा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार यह मामला फर्रुखाबाद शहर के सेनापति स्ट्रीट मोहल्ले का है। यहां रहने वाली महिला को 25 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे एक फोन कॉल आया था।
कॉल करने वाले व्यक्ति ने महिला से बातचीत शुरू की और कथित तौर पर उसे अपनी बातों में उलझाए रखा। इसी दौरान महिला के बैंक खाते से लगातार तीन बार रकम ट्रांसफर कर दी गई।
रिपोर्ट के मुताबिक पहली बार खाते से 80 हजार रुपये, दूसरी बार 20 हजार रुपये और तीसरी बार 38 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल रकम 1 लाख 38 हजार रुपये हो गई।
तीनों लेन-देन UPI के माध्यम से किए जाने की जानकारी सामने आई है। रकम ट्रांसफर होने के बाद कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना मोबाइल फोन बंद कर दिया।
तीन बार में निकाली गई रकम
इस साइबर ठगी में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़िता के खाते से पूरी रकम एक साथ नहीं निकाली गई।
साइबर ठगों ने कथित तौर पर तीन अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए रकम ट्रांसफर की। पहले 80 हजार रुपये, फिर 20 हजार रुपये और उसके बाद 38 हजार रुपये खाते से निकाले गए।
तीन लेन-देन में कुल रकम 1.38 लाख रुपये बैठती है।
इस तरह की घटनाओं में बैंक खाते से रकम निकलने के बाद मोबाइल पर आने वाले SMS या बैंकिंग ऐप के नोटिफिकेशन को तुरंत देखना बहुत जरूरी होता है। किसी अनजान ट्रांजैक्शन की जानकारी मिलते ही बैंक और साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करने में देरी नहीं करनी चाहिए।
महिला ने साइबर पोर्टल पर की शिकायत
ठगी का पता चलने के बाद पीड़िता ने मामले की शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर दर्ज कराई।
इसके बाद मामले को पुलिस के संज्ञान में लाया गया। रिपोर्ट के अनुसार शहर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान पुलिस ट्रांजैक्शन से संबंधित जानकारी और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तक पहुंचने का प्रयास करेगी।
UPI Fraud से कैसे बचें?
UPI ने डिजिटल भुगतान को काफी आसान बना दिया है। अब लोग कुछ सेकंड में किसी व्यक्ति या दुकान को पैसे भेज सकते हैं। लेकिन इसी सुविधा का गलत फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बनाने की कोशिश करते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर UPI PIN कभी भी दर्ज नहीं करना चाहिए।
UPI PIN का इस्तेमाल सामान्य तौर पर पैसे भेजते समय किया जाता है। पैसे प्राप्त करने के लिए किसी व्यक्ति को अपना UPI PIN बताने या डालने की जरूरत नहीं होती।
अगर कोई फोन करके कहता है कि आपको पैसे मिलने वाले हैं और इसके लिए कोई PIN, OTP या बैंक की जानकारी चाहिए, तो सावधान हो जाएं।
फोन कॉल पर बैंक की जानकारी साझा न करें
साइबर ठग अक्सर बैंक कर्मचारी, पुलिस अधिकारी, बिजली विभाग, कुरियर कंपनी, मोबाइल कंपनी या किसी अन्य संस्था का नाम लेकर लोगों से बातचीत शुरू करते हैं।
वे कभी-कभी ऐसी स्थिति पैदा करने की कोशिश करते हैं जिससे सामने वाला व्यक्ति घबरा जाए और बिना सोचे-समझे जानकारी साझा कर दे।
लोगों को ध्यान रखना चाहिए कि फोन पर किसी अनजान व्यक्ति को OTP, ATM PIN, UPI PIN, CVV, इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी नहीं देनी चाहिए।
अगर कोई व्यक्ति खुद को बैंक कर्मचारी बताकर फोन करता है, तो कॉल काटकर संबंधित बैंक के आधिकारिक नंबर पर स्वयं संपर्क करना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।
मोबाइल पर आने वाले मैसेज को नजरअंदाज न करें
बैंक खाते से होने वाले प्रत्येक ट्रांजैक्शन की सूचना को ध्यान से देखना चाहिए।
अगर खाते से ऐसी रकम निकलती है जिसे आपने स्वयं ट्रांसफर नहीं किया है, तो इसे तुरंत गंभीरता से लें।
कई बार लोग छोटी रकम के ट्रांजैक्शन को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई देती है तो तुरंत बैंक को सूचना देना जरूरी है।
इस मामले में भी तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन के जरिए बड़ी रकम खाते से निकल गई।
साइबर ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
अगर आपके बैंक खाते से बिना अनुमति पैसे निकल जाते हैं, तो सबसे महत्वपूर्ण बात समय बर्बाद न करना है।
पीड़ित को तुरंत अपने बैंक से संपर्क करना चाहिए और संदिग्ध ट्रांजैक्शन की जानकारी देनी चाहिए। साथ ही साइबर अपराध की शिकायत भी दर्ज करनी चाहिए।
भारत में साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत के लिए 1930 साइबर हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध है। इसके अलावा साइबर अपराध की शिकायत ऑनलाइन भी दर्ज की जा सकती है।
जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, उतनी जल्दी संबंधित एजेंसियों को लेन-देन की जांच और उपलब्ध धनराशि को रोकने की प्रक्रिया शुरू करने का अवसर मिल सकता है।
फर्रुखाबाद में बढ़ती साइबर जागरूकता की जरूरत
फर्रुखाबाद जैसे शहरों में भी डिजिटल बैंकिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लोग UPI, मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए रोजमर्रा के भुगतान कर रहे हैं।
डिजिटल भुगतान सुविधाजनक है, लेकिन इसके साथ डिजिटल सुरक्षा की जानकारी होना भी जरूरी है।
विशेष रूप से बुजुर्गों और उन लोगों को साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी देना जरूरी है जो मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन ऑनलाइन धोखाधड़ी के तरीकों से पूरी तरह परिचित नहीं हैं।
परिवार के युवा सदस्य अपने माता-पिता और अन्य परिजनों को भी बता सकते हैं कि अनजान फोन कॉल पर बैंक संबंधी जानकारी साझा नहीं करनी है।
अनजान लिंक और ऐप से रहें सावधान
साइबर अपराधी केवल फोन कॉल के जरिए ही नहीं, बल्कि SMS, WhatsApp, सोशल मीडिया और ईमेल के माध्यम से भी लोगों को निशाना बना सकते हैं।
किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी जांच करें।
इसी तरह किसी अनजान वेबसाइट से ऐप डाउनलोड करने से बचना चाहिए। मोबाइल में केवल भरोसेमंद और आधिकारिक स्रोतों से ही ऐप इंस्टॉल करना बेहतर है।
अगर कोई व्यक्ति किसी लिंक पर क्लिक करने, स्क्रीन शेयर करने या मोबाइल में कोई ऐप इंस्टॉल करने के लिए दबाव डालता है, तो पहले उसकी सत्यता की जांच करें।
पुलिस कर रही है मामले की जांच
फर्रुखाबाद में सामने आए इस मामले में पुलिस ने अज्ञात साइबर ठग के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रिपोर्ट के अनुसार मामले की जांच पुलिस अधिकारी द्वारा की जा रही है। फिलहाल आरोपी की पहचान और ठगी की पूरी प्रक्रिया से संबंधित जानकारी जांच का हिस्सा है।
इसलिए मामले में आगे की जांच के आधार पर ही आरोपी और रकम के संबंध में अधिक जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।
निष्कर्ष
फर्रुखाबाद में महिला के बैंक खाते से 1.38 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी है। रिपोर्ट के अनुसार 25 सितंबर को फोन कॉल के बाद तीन अलग-अलग UPI ट्रांजैक्शन के जरिए 80 हजार, 20 हजार और 38 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इसके बाद पीड़िता ने साइबर पोर्टल पर शिकायत की और पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की।
डिजिटल भुगतान आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है, इसलिए इससे जुड़े सुरक्षा नियमों को समझना भी उतना ही जरूरी है। किसी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN या बैंक की गोपनीय जानकारी न दें और संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखाई देते ही बैंक तथा साइबर हेल्पलाइन 1930 से संपर्क करें।

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