फर्रुखाबाद। मतदाता सूचियों में बड़ी संख्या में लोगों के नाम काटे जाने के विरोध में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को फर्रुखाबाद में जोरदार प्रदर्शन किया। जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने भोलेपुर से जेएनवी तिराहे तक पैदल मार्च निकाला। हाथों में तख्तियां लेकर चल रहे कार्यकर्ताओं ने रास्ते भर चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। मार्च के दौरान बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात रहा।
पैदल मार्च जेएनवी रोड स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास पहुंचा। यहां पहले से तैयार किए गए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले को आग के हवाले कर दिया गया। पुतला दहन के दौरान कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन को लेकर कुछ देर तक मौके पर गहमागहमी का माहौल बना रहा। स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान किए जाने की तैयारी शुरू कर दी है।
भोलेपुर से शुरू हुआ पैदल मार्च
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव की अगुवाई में पार्टी नेता और कार्यकर्ता भोलेपुर क्षेत्र में एकत्र हुए। इसके बाद सभी कार्यकर्ता हाथों में तख्तियां लेकर पैदल मार्च करते हुए फतेहगढ़ चौराहे की ओर रवाना हुए। प्रदर्शनकारियों के साथ पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
मार्च के दौरान कार्यकर्ताओं ने मतदाता सूची में नाम काटे जाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि लोकतंत्र में प्रत्येक पात्र नागरिक का मताधिकार बेहद महत्वपूर्ण है और मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी से आम नागरिक प्रभावित हो सकता है।
कार्यकर्ताओं ने रास्ते में चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी।
आंबेडकर प्रतिमा के पास फूंका पुतला
पैदल मार्च जब जेएनवी रोड स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा के पास पहुंचा तो प्रदर्शन का रुख और अधिक आक्रामक हो गया। यहां सपा कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पुतले को आग लगा दी।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार पुतला पहले से तैयार करके प्रदर्शन स्थल तक लाया गया था। पुलिस को इसकी जानकारी पुतला जलाए जाने के बाद हुई। कुछ समय के लिए मौके पर भ्रम की स्थिति भी बनी रही। बाद में स्पष्ट हुआ कि प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के विरोध में उनका प्रतीकात्मक पुतला जलाया है।
सपा कार्यकर्ताओं ने इस दौरान ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ और ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाए। पार्टी की ओर से मतदाता सूची को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की गई।
जिलाध्यक्ष ने उठाए मतदाता अधिकारों से जुड़े सवाल
प्रदर्शन के दौरान सपा जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव ने कहा कि मतदाता सूची में नाम कटने का मामला केवल राजनीतिक दलों से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा संबंध आम नागरिक के मताधिकार से है। उन्होंने लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और मतदाता अधिकारों की रक्षा किए जाने की मांग उठाई।
जिलाध्यक्ष ने प्रदर्शन के दौरान संविधान के अनुच्छेद 360 का भी उल्लेख किया और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी बात रखी। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों को लेकर गंभीर सवाल उठाए। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बड़ी संख्या में नाम प्रभावित हुए हैं और इस विषय पर चुनाव आयोग को स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए।
हालांकि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और नामों से जुड़े मामलों में अंतिम स्थिति संबंधित निर्वाचन अधिकारियों के रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होती है। राजनीतिक दलों द्वारा लगाए गए आरोपों को उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
पुलिस की रही कड़ी निगरानी
सपा के पैदल मार्च को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहा। प्रदर्शन स्थल और मार्च के रास्ते में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी रही। प्रशासन की कोशिश रही कि प्रदर्शन के दौरान यातायात और कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।
पुतला दहन के बाद पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल लोगों की पहचान करने की तैयारी शुरू की है। पुलिस की ओर से प्रदर्शन की गतिविधियों और मौके पर मौजूद लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
पुतला दहन के बाद मौके पर कुछ समय के लिए हलचल बढ़ गई। हालांकि प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी जारी रखी और इसके बाद कार्यक्रम आगे बढ़ा।
कई प्रमुख सपा नेता रहे मौजूद
प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ और स्थानीय नेता तथा कार्यकर्ता शामिल हुए। इनमें पूर्व विधायक अजीत कठेरिया, उर्मिला राजपूत, सर्वेश आंबेडकर, नदीम फारूकी, सरल दुबे, राशिद जमाल सिद्दीकी, हरीश कुमार, विवेक सिंह यादव और सौरभ कटियार सहित अन्य कार्यकर्ताओं के नाम सामने आए हैं।
बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के सड़क पर उतरने से इलाके में राजनीतिक गतिविधि तेज दिखाई दी। कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाया।
मतदाता सूची को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए मतदाता सूची को लेकर राजनीतिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर लगातार चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रही है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में पात्र लोगों के नाम सुरक्षित रहना जरूरी है।
वहीं, मतदाता सूची का पुनरीक्षण निर्वाचन प्रक्रिया का नियमित हिस्सा है। ऐसे में किसी भी नाम के हटने या जुड़ने की स्थिति निर्धारित नियमों और सत्यापन प्रक्रिया के आधार पर तय होती है। राजनीतिक दलों की आपत्तियों के बीच अब यह मुद्दा स्थानीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गया है।
फर्रुखाबाद में मंगलवार को हुआ सपा का प्रदर्शन इसी राजनीतिक माहौल का हिस्सा माना जा रहा है। कार्यकर्ताओं ने पैदल मार्च के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर की और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध दर्ज कराया।
सड़क पर दिखा राजनीतिक विरोध
भोलेपुर से जेएनवी रोड तक निकले इस मार्च में कार्यकर्ताओं की संख्या लगातार दिखाई देती रही। हाथों में तख्तियां और नारे लगाते हुए कार्यकर्ता आगे बढ़ते रहे। आंबेडकर प्रतिमा के पास पहुंचने के बाद पुतला दहन किया गया।
सपा नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र में मतदाता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। इसलिए मतदाता सूची में किसी भी पात्र व्यक्ति का नाम छूटने या हटने की स्थिति को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया।
प्रदर्शन के बाद अब पुलिस की ओर से की जाने वाली कार्रवाई और प्रशासनिक स्तर पर इस मुद्दे को लेकर होने वाली गतिविधियों पर नजर रहेगी। फिलहाल फर्रुखाबाद में सपा के इस प्रदर्शन ने स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है।
फर्रुखाबाद में मतदाता सूची को लेकर शुरू हुआ यह विरोध आने वाले दिनों में और तेज होता है या नहीं, यह देखने वाली बात होगी। स्थानीय राजनीतिक दलों की गतिविधियों के साथ-साथ प्रशासन और निर्वाचन अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर भी लोगों की नजर बनी हुई है।

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