मथुरा। उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के वृंदावन में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। चैतन्य विहार स्थित एक आवासीय संस्कृत गुरुकुल में पानी की टंकी की सफाई के दौरान चार छात्रों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य छात्र को गंभीर हालत में बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। शुरुआती जांच में टंकी के अंदर जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी की आशंका जताई जा रही है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह की जांच अभी जारी है।
घटना मंगलवार देर रात की बताई जा रही है। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। छात्रों को टंकी से बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया, जहां चार को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। एक छात्र का इलाज कराया गया और उसकी हालत स्थिर बताई गई है। पुलिस ने मामले में गुरुकुल के संचालक को गिरफ्तार किया है और पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी गई है।
बदबू आने के बाद टंकी की सफाई का प्रयास
पुलिस और प्रशासन से मिली प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गुरुकुल परिसर में एक पानी की टंकी से दुर्गंध आने की बात सामने आई थी। इसके बाद छात्रों ने टंकी की सफाई करने का प्रयास किया।
बताया गया कि टंकी में कुछ पानी मौजूद था। पहले मोटर और अन्य तरीके से पानी निकालने की कोशिश की गई। इसके बाद एक छात्र टंकी के अंदर गया। कुछ देर तक उसके बाहर नहीं आने पर अन्य छात्रों ने उसे देखने और बाहर निकालने का प्रयास किया।
एक के बाद एक कई छात्र टंकी के अंदर उतर गए। इसके बाद वे भी बाहर नहीं आए और अंदर ही बेहोश हो गए। बाहर मौजूद लोगों को जब स्थिति का अंदाजा हुआ तो अफरा-तफरी मच गई। छात्रों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया गया।
एक छात्र को बचाया गया
हादसे में पांच छात्र टंकी के अंदर गए थे। उन्हें किसी तरह बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। इलाज के दौरान चार छात्रों की मौत हो गई, जबकि पांचवां छात्र बच गया।
अधिकारियों के अनुसार जीवित बचे छात्र की हालत फिलहाल स्थिर है। घटना के बाद उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। पुलिस और प्रशासन की टीम ने उससे भी घटना के संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया है।
सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बचा हुआ छात्र घटना के क्रम के बारे में जानकारी देता दिखाई देता है। हालांकि किसी वायरल वीडियो में कही गई हर बात को आधिकारिक तथ्य मानने के बजाय पुलिस जांच के निष्कर्ष का इंतजार किया जा रहा है।
चार छात्रों की हुई मौत
हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों की पहचान पुलिस और प्रशासन की ओर से की गई है। इनमें मध्य प्रदेश के जबलपुर क्षेत्र के मनु कटारे, मेरठ के विशु शर्मा, कौशांबी के आर्यन शर्मा/पांडेय और विदिशा क्षेत्र के देवांश शामिल हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में कुछ मृतकों की उम्र और नाम के विवरण में मामूली अंतर सामने आया है, इसलिए अंतिम आधिकारिक रिकॉर्ड को ही निर्णायक माना जाएगा।
चारों छात्रों की मौत की खबर जैसे ही उनके परिवारों तक पहुंची, घरों में कोहराम मच गया। परिजन मथुरा पहुंचे और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव उन्हें सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है।
टंकी के अंदर जहरीली गैस की आशंका
इस हादसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर पानी की टंकी के अंदर ऐसा क्या हुआ कि कुछ ही समय में छात्र बेहोश हो गए और चार की जान चली गई।
प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने टंकी के अंदर जहरीली गैस मौजूद होने की आशंका जताई है। कुछ रिपोर्टों में ऑक्सीजन की कमी की संभावना का भी उल्लेख किया गया है। टंकी करीब 12 फीट या उससे अधिक गहरी बताई गई है।
हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि छात्रों की मौत केवल किसी एक विशेष गैस के कारण हुई। घटना की वास्तविक वजह पोस्टमार्टम, जांच और अन्य तकनीकी परीक्षणों के बाद स्पष्ट हो सकेगी।
संचालक गिरफ्तार, पुलिस ने शुरू की जांच
घटना के बाद पुलिस ने गुरुकुल के संचालक आशीष कुमार शर्मा के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया है। पुलिस अब यह जांच कर रही है कि छात्रों को टंकी के अंदर जाने की अनुमति किस परिस्थिति में दी गई और उस समय सुरक्षा के क्या इंतजाम थे।
एक मृतक छात्र के पिता की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में गुरुकुल प्रबंधन पर छात्रों को टंकी की सफाई के लिए अंदर भेजने और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं करने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।
पुलिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि घटना से पहले और उसके दौरान वास्तव में क्या हुआ था और टंकी में छात्रों के उतरने की पूरी प्रक्रिया क्या थी।
मजिस्ट्रेट जांच के आदेश
मथुरा के जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने मामले की जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट को जिम्मेदारी दी है। जांच में केवल हादसे के कारणों को ही नहीं बल्कि संस्थान के संचालन से जुड़े दूसरे पहलुओं को भी देखा जाएगा।
रिपोर्टों के अनुसार गुरुकुल की मान्यता, पंजीकरण और अन्य प्रशासनिक पहलुओं की भी जांच की जा रही है। इससे साफ है कि प्रशासन हादसे को केवल एक दुर्घटना के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि संस्थान में सुरक्षा और संचालन से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
हादसे के बाद गुरुकुल में दहशत का माहौल
चार छात्रों की मौत के बाद गुरुकुल में पढ़ने वाले अन्य बच्चों और उनके परिवारों में भी डर का माहौल है। हादसे की खबर फैलने के बाद कई अभिभावक अपने बच्चों को लेने के लिए वहां पहुंचे।
कुछ परिजनों ने संस्थान की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठाए और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई। कई परिवार अपने बच्चों को फिलहाल घर ले गए हैं। प्रशासन ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर छात्रों और संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई है।
गुरुकुल में बड़ी संख्या में छात्र संस्कृत और धार्मिक शिक्षा प्राप्त करते हैं। हादसे के बाद अब संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
मुख्यमंत्री ने जताया दुख
हादसे की जानकारी सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना पर दुख जताया और मृत छात्रों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। मुख्यमंत्री की ओर से प्रत्येक मृतक छात्र के परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की गई है।
सरकार की ओर से घायल छात्र के उपचार और घटना की जांच को लेकर भी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
जिन परिवारों ने अपने बच्चों को शिक्षा और बेहतर भविष्य की उम्मीद में गुरुकुल भेजा था, उन्हें अचानक उनकी मौत की खबर मिली। हादसे की सूचना के बाद परिजन रातोंरात मथुरा पहुंचे।
कुछ परिवारों के लिए यह सदमा इसलिए भी गहरा है क्योंकि घटना से कुछ घंटे पहले ही उनकी अपने बच्चों से बातचीत हुई थी। स्थानीय रिपोर्टों में मृत छात्र विशु के परिवार का जिक्र आया है, जिनसे उसने घटना से कुछ घंटे पहले घर आने की बात कही थी। इसके बाद परिवार को उसकी मौत की खबर मिली।
अब जांच से सामने आएगा हादसे का सच
फिलहाल पुलिस और प्रशासन की जांच जारी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल की स्थिति और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान जांच में महत्वपूर्ण होंगे।
सबसे अहम सवाल यही है कि छात्रों को इतनी गहरी और संभावित रूप से खतरनाक पानी की टंकी में किस परिस्थिति में उतारा गया और वहां प्रवेश करने से पहले गैस या ऑक्सीजन की स्थिति की जांच क्यों नहीं की गई। इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
मथुरा के वृंदावन में हुआ यह हादसा शिक्षण और आवासीय संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। पानी की टंकी, सीवर, कुएं या किसी भी बंद स्थान में जहरीली गैस या ऑक्सीजन की कमी का खतरा हो सकता है। ऐसे स्थानों में बिना विशेषज्ञ सुरक्षा व्यवस्था के किसी व्यक्ति का प्रवेश जानलेवा साबित हो सकता है।
फिलहाल चार परिवार अपने बच्चों को खोने के गम में हैं और पूरे मामले में प्रशासन की जांच पर लोगों की नजर बनी हुई है। पुलिस का कहना है कि जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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